Thursday, 21 April 2016

निजी रिश्तेदार विदेश से फ़ोन कर के पापा से बात करते हे की बीमारी के क्या हाल हे

पापा ने कहा की बुढ़ापे में तो कोई ना कोई बीमारी होती रहती हे
रिश्तेदार बोला बहुत पैसे लगते हे

ये बो रिश्तेदार हे जिनकी १९७० में नौकरी के लिए भिखारी की तरह भटकते थे और मेरे पापा ने जयपुर में इनको और इनकी पत्नी को भी रखा
और महीनो रखा ,किसी तरह से इनको  बड़ोदा निजी नौकरी में भेजा
और उसके बाद भी समय समय पर इनकी सेवा करी और आज ये

पैसे या धन के बल पर घमंड ?

और ये पापा से उम्र में छोटे हे 

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